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अमरनाथ यात्रियों पर नहीं होते हमले, अगर सुरक्षाबल इन 5 बातों पर देते ध्यान

अमरनाथ यात्रियों पर नहीं होते हमले, अगर सुरक्षाबल इन 5 बातों पर देते ध्यान

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दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ यात्रियों को ले जा रही बस पर बीती 10 जुलाई को हुए आतंकवादी हमले के मामले की जांच के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. इस हमले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर सुरक्षा बलों से कहां चूक हुई?

1. सवाल यह भी उठ रहा है कि अमरनाथ यात्रियों की यह बस 8 जुलाई को दर्शन के बाद ही सुरक्षा कॉन्वॉय से अलग क्यों हुई? और अगर ये बस श्रीनगर में दो दिन तक घूम रही थी, तो पुलिस और CRPF ने नाकों पर यात्रियों की चेकिंग क्यों नहीं की गई.

2. नियम के मुताबिक, श्रीनगर से वापस आने तक सभी गाड़ियों को 2 बजे तक जवाहर टनल क्रॉस कर लेना चाहिए, जबकि ये बस 4.30 के बाद श्रीनगर से जम्मू के लिए निकली. ऐसे में फिर किसी सुरक्षा पिकेट पर इसे क्यों नहीं रोका गया.

3. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गुजरात नंबर की इस बस पर बालटाल अमरनाथ यात्रा की पार्किंग का स्टिकर चिपका हुआ था, जिससे ये साफ पता चल रहा था कि ये बस अमरनाथ यात्रा में वापस आई है. उसके बावजूद ये कहा गया कि ये टूरिस्ट बस थी.

4. फिर खानबल के पास जब बस पंचर हुई, तो उस वक्त आतंकियों को अपने इनफॉर्मर से यह पता चल गया था कि बस के साथ कोई सुरक्षा कॉन्वॉय नहीं है. इसी के बाद आतंकियों ने इसे टारगेट करने का फैसला कर लिया था. इस दौरान अगर बस को सुरक्षा मिलती तो शायद ये घटना नहीं होती.

5. इस बीच यह भी पता है कि श्राईन बोर्ड की वेबसाइट से ऑनलाइन यात्रा पर्ची लेने वाले ज्यादातर यात्री सुरक्षा नियमों का पालन नही करते हैं. बहुत से तीर्थयात्री सीधे जम्मू कश्मीर आकर प्राइवेट गाड़ी लेते हैं और वहां यात्रा पर निकल पड़ते हैं. इस बात से पूरी तरह वाकिफ होने के बाद भी आखिर पुलिस यात्रा नियमों का कड़ाई से पालन क्यों नहीं करवाती है.